परिचय

गोंद कतीरा एक प्राकृतिक औषधीय गोंद है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है। यह विशेष रूप से शरीर की गर्मी को शांत करने, खून को साफ रखने और कई प्रकार के आंतरिक व बाहरी रोगों में लाभकारी माना जाता है। OnlinePansari.in पर हम आपको गोंद कतीरा से जुड़ी पूरी जानकारी सरल हिंदी में प्रदान कर रहे हैं।


गोंद कतीरा के औषधीय गुण

  • रंग: सफेद से हल्का पीला
  • स्वाद: फीका व हल्का खट्टा
  • स्वरूप: कांटेदार पेड़ से प्राप्त प्राकृतिक गोंद
  • स्वभाव: शीतल (ठंडा)
  • तुलना: बबूल के गोंद एवं लौकी के बीज के समान

मुख्य गुण

  • शरीर के खून को गाढ़ा करता है
  • हृदय की कठोरता को दूर करता है
  • आंतों की खराश को शांत करता है
  • खांसी, कफ और सांस के रोगों में लाभकारी
  • छाती की खरखराहट व फेफड़ों के घाव में सहायक
  • शरीर से निकलने वाले अनावश्यक रक्तस्राव को रोकता है
  • गर्म मिजाज वाले व्यक्तियों में विष (जहर) को शांत करता है
  • पेशाब की जलन, मासिक धर्म की समस्या, हाथ‑पैरों की जलन में लाभ

सेवन की मात्रा

➡️ सामान्यतः 4 ग्राम गोंद कतीरा पर्याप्त माना जाता है।


गोंद कतीरा के 14 फायदे और उपयोग

1. जीभ की जलन व सूजन

10–20 ग्राम गोंद कतीरा रात को भिगो दें। सुबह उसी पानी में घोटकर मिश्री मिलाकर पिएं। इससे जीभ की सूजन व जलन दूर होती है।

2. मूत्र रोग

10–20 ग्राम गोंद कतीरा फुलाकर मिश्री के साथ शर्बत बनाकर सुबह‑शाम सेवन करें।

3. मासिक धर्म संबंधी परेशानी

गोंद कतीरा और मिश्री समान मात्रा में पीसकर 2 चम्मच कच्चे दूध के साथ सेवन करें।

4. कौआ गिरना

10–20 ग्राम गोंद कतीरा पानी में फुलाकर मिश्री वाले शर्बत में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

5. पेचिश

6 ग्राम गोंद कतीरा 250 मिली पानी में भिगो दें। सुबह छानकर 10 ग्राम चीनी मिलाकर पिएं।

6. अधिक गर्मी लगना

गर्मी अधिक लगने पर गोंद कतीरा को मिश्री वाले शर्बत के साथ सुबह‑शाम सेवन करें।

7. रक्तप्रदर

10–20 ग्राम गोंद कतीरा रात में भिगोकर सुबह मिश्री के साथ शर्बत बनाकर पिएं।

8. सिर दर्द व बाल झड़ना

4 ग्राम मेंहदी के फूल और 3 ग्राम गोंद कतीरा रात को भिगो दें। सुबह मिश्री के साथ पीसकर सेवन करें।

9. हाथ‑पैरों की जलन

गोंद कतीरा रात को पानी में भिगोकर सुबह चीनी मिलाकर पिएं।

10. गले की गांठ

10–20 ग्राम गोंद कतीरा पीसकर मिश्री मिले पानी के साथ सुबह‑शाम पिएं।

11. कंठमाला (गले की गांठ)

  • 2 भाग गोंद कतीरा + 2 भाग नानख्वा, धनिया पत्ती के रस में मिलाकर लेप करें।
  • या 10–20 ग्राम गोंद कतीरा मिश्री के शर्बत के साथ पिएं।

12. स्वरयंत्र की जलन

गोंद कतीरा को पहले भिगोकर मिश्री वाले शर्बत में मिलाकर सुबह‑शाम पिएं।

13. विन्सेन्ट एंजाइना

10–20 ग्राम गोंद कतीरा फुलाकर मिश्री के शर्बत के साथ सेवन करें।

14. गले की पेशियों का पक्षाघात

गोंद कतीरा पानी में फुलाकर मिश्री मिले शर्बत के साथ सुबह‑शाम सेवन करें।


गोंद कतीरा के दुष्प्रभाव

  • अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में गोटी (जमाव) बन सकता है।

दोष निवारक

➡️ अनीसून (सौंफ) गोंद कतीरा के दोषों को कम करता है।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी जड़ी‑बूटी या आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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