दालचीनी का तेल: फायदे, उपयोग
दालचीनी से प्राप्त यह तेल उच्च गुणवत्ता वाला होता है और सामान्यतः मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से उपलब्ध रहता है। इसमें दालचीनी की विशिष्ट सुगंध और स्वाद पाया जाता है। ताज़ा दालचीनी का तेल हल्के पीले रंग का होता है, जबकि समय के साथ इसका रंग लाल से भूरे रंग में परिवर्तित हो जाता है। यह तेल भारी एवं गरिष्ठ प्रकृति का होता है, इसलिए पानी में डालने पर डूब जाता है। दालचीनी में लगभग 2 प्रतिशत उड़नशील तेल पाया जाता है। इस तेल में सिनेमिक एसिड, गोंद, राल, टैनिन, शर्करा, स्टार्च तथा भस्म जैसे तत्व उपस्थित होते हैं। दालचीनी का तेल दर्द, घाव और सूजन को कम करने में प्रभावी माना जाता है।
दालचीनी तेल के सेवन की मात्रा
दालचीनी का तेल ऊष्ण प्रकृति का होता है, इसलिए इसका सेवन बहुत कम मात्रा से प्रारंभ करना चाहिए और आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे मात्रा बढ़ानी चाहिए। यदि इसके सेवन से किसी प्रकार का दुष्प्रभाव या असहजता महसूस हो, तो कुछ समय के लिए इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए तथा बाद में पुनः बहुत थोड़ी मात्रा से सेवन आरंभ करना उचित रहता है।
सामान्यतः दालचीनी के तेल की मात्रा 1 से 4 बूंद तक प्रयोग में लाई जाती है। यह तेल तीक्ष्ण और उग्र गुणों वाला होता है, इसलिए इसे आंखों के आसपास कभी भी नहीं लगाना चाहिए।
Castor Oil- Edible Grade | एरंड तेल | Organic Cold Press
दालचीनी तेल के फायदे एवं उपयोग
-
पेट की गैस:
दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें 1 चम्मच चीनी (शक्कर) में मिलाकर सेवन करने से पेट की गैस में राहत मिलती है। ध्यान रखें, अधिक मात्रा में इसका सेवन हानिकारक हो सकता है।
-
दांत दर्द:
दुखते दांत पर दालचीनी का तेल लगाने से दर्द में आराम मिलता है। इसके अलावा, चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर को गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है। चाहें तो इसे 1 चम्मच शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
-
जुकाम:
1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल मिश्री के साथ दिन में 2–3 बार लेने से जुकाम में आराम मिलता है। रूमाल में तेल की कुछ बूंदें डालकर सूंघने से भी लाभ होता है।
-
बहरापन:
कम सुनाई देने की समस्या में कान में दालचीनी का तेल डालने से लाभ मिल सकता है।
-
हिचकी:
आधा कप पानी में 3 बूंद दालचीनी का तेल मिलाकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
-
टायफाइड:
टायफाइड के उपचार के दौरान अन्य दवाओं के साथ प्रतिदिन एक बार आधा कप पानी में 3 बूंद दालचीनी का तेल मिलाकर देने से शीघ्र लाभ होता है।
-
यक्ष्मा (टी.बी.):
2 चम्मच मिश्री पर दालचीनी के तेल की 4 बूंद डालकर दिन में तीन बार लेने से टी.बी. में लाभ होता है। यदि फेफड़ों से रक्तस्राव हो रहा हो, तो आधा चम्मच दालचीनी पाउडर पानी के साथ दिन में दो बार लेने से फायदा मिलता है।
-
शरीर में गर्मी एवं चेतना:
यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो जाए, शरीर ठंडा पड़ जाए या अत्यधिक कमजोरी हो, तो दालचीनी के आधा चम्मच तेल को 3 चम्मच तिल के तेल में मिलाकर मालिश करने से शरीर में गर्माहट और चेतना आती है।
-
अग्निमान्द्य (भोजन न पचना):
2–3 ग्राम बारीक पिसी देशी चीनी में दालचीनी के शुद्ध तेल की 5–6 बूंद मिलाकर सुबह-शाम सोने से पहले एक सप्ताह तक लेने से पाचन शक्ति में सुधार होता है।
-
अन्य सरल प्रयोग:
-
1 कप पानी में दालचीनी के तेल की 2–3 बूंद मिलाकर सेवन करने से इन्फ्लूएंजा, बुखार, दस्त, आंतों के दर्द, हिचकी और उल्टी में लाभ होता है।
-
दालचीनी के तेल या रस में रुई भिगोकर दर्द करती दाढ़ या दांत पर रखने से भी आराम मिलता है।
- पुनर्लेखन (Rephrased): दालचीनी तेल के अन्य लाभ एवं प्रयोग
- दांतों में कीड़े लगना:
दालचीनी के तेल में रुई भिगोकर दांत के गड्ढे में रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में राहत मिलती है।
- अफारा (गैस बनना):
दालचीनी के तेल की 1 से 3 बूंद मिश्री के साथ सुबह और शाम देने से पेट के अफारे में लाभ होता है।
- डकार आना:
1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल बताशे या चीनी पर डालकर सुबह-शाम सेवन करने से डकार और पेट की गैस की समस्या कम होती है।
- जीभ एवं त्वचा की सुन्नता:
जीभ का लकवा या जीभ सुन्न होने की स्थिति में 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल मिश्री में मिलाकर दिन में 2–3 बार सेवन करें। साथ ही दालचीनी का चूर्ण मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसते रहें।
- यात्राजन्य रोग:
यात्रा के दौरान उबकाई से बचाव के लिए 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल बताशे पर डालकर मुंह में रखने से लाभ मिलता है।
- वमन (उल्टी):
दालचीनी के तेल की 5 बूंद ताल मिश्री के चूर्ण या बताशे में डालकर खाने से पेट दर्द और उल्टी की समस्या में आराम मिलता है।
- कैंसर रोग:
कैंसर में दालचीनी का प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है। दालचीनी का तेल 3 बूंद दिन में तीन बार दें तथा दालचीनी चबाने का निर्देश दें। यदि बाहरी घाव हों तो उन पर तेल लगाने से भी लाभ होता है। यह प्रतिदूषक, व्रणशोधक, व्रणरोपक और रोगाणुनाशक गुणों से युक्त है।
- गर्भवती स्त्री की उल्टी:
गर्भावस्था में होने वाली उल्टी को रोकने के लिए 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल मिश्री के साथ सुबह-शाम सेवन कराने से लाभ होता है।
- मासिक-धर्म समाप्ति के बाद होने वाले शारीरिक व मानसिक विकार:
मासिक धर्म समाप्त होने के बाद उत्पन्न शारीरिक और मानसिक परेशानियों में 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल बताशे पर डालकर सुबह-शाम सेवन करना उपयोगी होता है।
- एड्स:
दालचीनी एड्स में लाभकारी मानी जाती है क्योंकि यह श्वेत रक्त कणों की वृद्धि में सहायक होती है। दालचीनी का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग या तेल 1 से 3 बूंद दिन में तीन बार सेवन किया जाता है। यह पेट के कीड़े नष्ट करने और घाव भरने में भी सहायक है।
- रक्तप्रदर:
रक्तप्रदर में अशोकारिष्ट के साथ 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल दिन में दो बार लेने से गर्भाशय की शिथिलता कम होती है और रक्तस्राव में सुधार आता है। इस स्थिति में दालचीनी चबाना भी लाभकारी है।
- वीर्य विकार:
दालचीनी के तेल में तीन गुना जैतून का तेल मिलाकर शिश्न पर लगाने से पुरुष शक्ति में सुधार होता है। ध्यान रखें कि उपचार के बाद ठंडा पानी न लगे।
- योनि दर्द:
1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल बताशे पर डालकर रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से योनि दर्द में आराम मिलता है।
- पेट दर्द:
दालचीनी के तेल की 1 से 3 बूंद मिश्री के साथ लेने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
- हाथ-पैरों की ऐंठन:
हाथ-पैरों की ऐंठन में दालचीनी का तेल 1 से 2 बूंद रोजाना सेवन कराने से लाभ होता है।
- सिरदर्द:
5–6 बूंद दालचीनी के तेल को 2–3 चम्मच तिल के तेल में मिलाकर मालिश करने से सिरदर्द में आराम मिलता है।
- नाड़ी का दर्द:
नाड़ी दर्द में सुबह-शाम मिश्री के साथ 1 से 3 बूंद दालचीनी का तेल सेवन करने और प्रभावित स्थान पर इसके तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के दर्द में राहत मिलती है।
Amritdhara | अमृतधारा | Pocket Doctor