लाख एक प्राकृतिक प्रकार की गोंद है, जो अधिक दूध (क्षीर) देने वाले वृक्षों से प्राप्त होती है। इसका निर्माण एक अत्यंत सूक्ष्म, लाल रंग के कीट द्वारा होता है। वास्तव में, लाख का उत्पादन पूरी तरह इन्हीं कीटों पर निर्भर करता है। जिन दूध वाले पेड़ों पर इन कीटों को बसाया जाता है, उन्हीं वृक्षों से लाख उत्पन्न होती है। विभिन्न प्रकार की लाख में पीपल के वृक्ष से प्राप्त लाख को सर्वोत्तम गुणवत्ता की माना जाता है।
लाख के गुण :
- रंग: लाख पीले, लाल तथा काले रंग में पाई जाती है।
- स्वाद: इसका स्वाद सामान्यतः फीका होता है।
- लाख शरीर की शुद्धि करती है, सूजन को कम करती है और आंतरिक दोषों को दूर करने में सहायक होती है।
- यह यकृत (जिगर) को सुदृढ़ बनाती है तथा हृदय संबंधी रोगों में लाभकारी मानी जाती है।
- फालिज, लकवा, खांसी, श्वसन रोगों और पेट में पानी भरने जैसी समस्याओं में उपयोगी होती है।
- लाख कांवड़ (दर्द/जकड़न) को शांत करती है और गुर्दों की कमजोरी को दूर करने में सहायक होती है।
- यह वात दोष को शांत करती है।
- लाख वीर्यवर्धक है और शारीरिक शक्ति बढ़ाने में मदद करती है।
- इसके सेवन से शरीर शुद्ध, शीतल, बलवान और स्निग्ध बनता है।
- लाख उष्ण नहीं होती तथा कफ-पित्त विकार, हिचकी, खांसी, ज्वर, फोड़े-फुंसी, छाती के आंतरिक घाव, सर्प विष, पेट के कीड़े और कुष्ठ जैसे रोगों में लाभ पहुंचाती है।
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सेवन की मात्रा :
शुद्ध लाख का सेवन सामान्यतः 1 से 6 ग्राम तक किया जा सकता है।
विभिन्न रोगों में लाख के लाभ एवं उपयोग :
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खांसी: लाख के चूर्ण को शक्कर की चाशनी में मिलाकर सेवन करने से खांसी में राहत मिलती है तथा कफ (बलगम) के साथ खून आना बंद हो जाता है।
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उरःक्षत (सीने में घाव): शुद्ध लाक्षा (लाख) का लगभग 1 ग्राम चूर्ण 4–6 ग्राम शहद के साथ, या 100–200 मिलीलीटर दूध के साथ, अथवा 14 मिलीलीटर मद्य (शराब) के साथ दिन में दो बार लेने से लाभ होता है।
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घाव: लाख को घी में भूनकर घाव पर रखकर पट्टी बाँधें, या इसे तेल में मिलाकर घाव पर लगाएँ। इससे घाव भरने में सहायता मिलती है।
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रक्तप्रदर:
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लाख के चूर्ण को गाय के घी के साथ सेवन करना रक्तप्रदर में लाभकारी माना जाता है।
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लाख को घी में भूनकर या दूध में उबालकर सुखा लें और उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ लेने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
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शुद्ध लाख 1–2 ग्राम को लगभग 100–250 मिलीलीटर चावल धोए हुए पानी के साथ सुबह-शाम लेने से भी रक्तप्रदर में आराम मिलता है।
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रक्तपित्त: लाख और पीपल को बारीक पीसकर पाउडर बना लें। इस मिश्रण का 1 ग्राम शहद के साथ दिन में 2–3 बार चाटने से रक्तपित्त के कारण होने वाली खून की उल्टी में लाभ होता है।
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नहरूआ (स्यानु): लाख और देशी साबुन को पीसकर हल्का गर्म कर लें। इस लेप को नहरूआ रोग से पीड़ित व्यक्ति के घाव पर लगाने से लाभ मिलता है।
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मस्तिष्कावरण शोथ: लाख से निकाले गए तेल से पूरे शरीर की मालिश करने पर इस रोग में विशेष लाभ होता है।


